खामोशी ने दी है दस्तक खूबसूरत सी एक आस को
खामोशी ने बुझ्हाया है जन्मों की एक प्यास को
तलाश में तो थे हम शब्दों के
पर हाथ लगाया हमने खामोशी के राज़ को
खामोशी ने दिखाया है नज़रों का झुकना
खामोशी ने फ़रमाया है होठों का न हिलना
सुनना तो चाहते थे गीतों के गुन्जुन को
पर चाहत बनाई हमने खामोशी की श्वास को
खामोशी तो एक अदा है जो सब पे मेहेरबान नही होति
खामोशी तो एक नशा है जो सबपे रंग नही चढाती
भटक तो रहे थे गुनगुनाते हुए भवरें की तरह
पर गले लगाया हमने खामोशी के साज़ को
खामोशी तो एक ताकत है
जिससे शब्द भी शर्मा जाए
खामोशी तो इबादत है
जिससे खुदा भी हिल जाए
लोग तो कहते है खामोशी मजबूर है
हमसे पूछे कोई, खामोशी तो एक सुरूर है
लोग तो कहते है खामोशी.. खामोश है
हमने महसूस किया है.. खामोशी, मदहोश है