एक नुमाइश बाकी है
वो आज़माइश बाकी है
जब हर हरकत नज़र में हो
जब साँसे भी समर में हो
एक फरमाइश बाकी है
वो आराइश बाकी है
जब मुस्कराहट की कमी हो
जब हर शब्द में सिर्फ हँसी हो
एक ख्वाहिश बाकी है
वो बारिश बाकी है
जब ये ज़ुल्फ़ें भीगी हों
जब हर बूँद गीली हो
Monday, July 5, 2010
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