आँखों में चमक दिख जाती है
जब किसी के करीब होते हो
नज़रें ही पलट जाती हैं
जब हमसे मुख़ातिब होते हो
आवाज़ कि गहराई में नशा छा जाता है
उसके के लिए धुन जब बजाते हो
साज़ का आगाज़ ही नहीं हो पाता
हमारे सामने जब भी आते हो
ख़्वाबों कि दुनिया रंग जाती है
तस्वीर उसकी जब बनाते हो
एक लकीर भी बार बार बिगड़ जाती है
हमारी जुल्फें भी जब सँवारते हो
पर यकीन है हमे
कि हम कुछ ख़ास ही है
जिससे मिलके
सारे होश गँवाते हो
Wednesday, June 30, 2010
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