Wednesday, June 30, 2010

आँखों में चमक दिख जाती है
जब किसी के करीब होते हो
नज़रें ही पलट जाती हैं
जब हमसे मुख़ातिब होते हो

आवाज़ कि गहराई में नशा छा जाता है
उसके के लिए धुन जब बजाते  हो
साज़ का आगाज़ ही नहीं हो पाता
हमारे सामने जब भी आते  हो

ख़्वाबों कि दुनिया रंग जाती है
तस्वीर उसकी जब बनाते हो
एक लकीर भी बार बार बिगड़ जाती है
हमारी जुल्फें भी जब सँवारते हो

पर यकीन है हमे
कि हम कुछ ख़ास ही है
जिससे मिलके
सारे होश गँवाते हो
बोल दूँ अगर
जा रही हूँ मैं
पूछोगे क्या तुम
जाना ज़रूरी है

बोल दूँ अगर
खुश हूँ मैं
सोचोगे क्या तुम
किसकी खुमारी है

बोल दूँ अगर
जी रही हूँ मैं
समझोगे क्या तुम
कि धड़कन तुम्हारी है

Wednesday, June 16, 2010

कुछ अधूरी कहानियाँ
कुछ अनकहे किस्से
कुछ बिखरी ख्वाहिशें
कुछ भूले सपने

कुछ मनचली जिंदिगी
कुछ बेईमान हसरतें
कुछ बार बार गलतियां
कुछ कच्चे रस्ते

कुछ मीठी यादें
कुछ दिल कि बातें
कुछ महकती हवाएं
शायद कुछ ......अदाएं