skip to main
|
skip to sidebar
mehfil
Monday, March 29, 2010
सादगी थी
खूबसूरती नहीं
याराना था
आवारगी नहीं
कसक थी
सिसकियाँ नहीं
दीवानापन था
दिवानगी नहीं
मोहब्बत तो थी
पर बदनामी नहीं
बटी हुई दो तरफ
किस किनारे पे भरोसा करे
तभी दौड़ती हुई
शायद समुन्दर को मिलती है
धड़कन सुनाई क्यों सुनाई दे रही
शायद दिल अब तक यहीं है
कोशिश तो बार बार कि है
पर दम निकलता ही नहीं है
Newer Posts
Older Posts
Home
Subscribe to:
Comments (Atom)
waah
anshu
Followers
Blog Archive
►
2011
(1)
►
October
(1)
▼
2010
(10)
►
July
(1)
►
June
(3)
►
May
(1)
▼
March
(3)
सादगी थी खूबसूरती नहीं याराना था आवारगी नहीं कसक ...
बटी हुई दो तरफ किस किनारे पे भरोसा करे तभी दौड़ती ह...
धड़कन सुनाई क्यों सुनाई दे रही शायद दिल अब तक यहीं...
►
February
(1)
►
January
(1)
►
2009
(16)
►
October
(2)
►
September
(3)
►
August
(10)
►
July
(1)
About Me
parul
View my complete profile