कोई आरज़ू होती
तो ज़िन्दगी जीने जैसी होती
कोई सपने होते
तो नींद में भी हँसी होती
कोई तमन्ना होती
तो दिवानगी भी फितरत होती
शायद कुछ कमीं होती
तो पुरा होने में खुशी होती
Saturday, September 19, 2009
Tuesday, September 8, 2009
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