Saturday, September 19, 2009

कोई आरज़ू होती
तो ज़िन्दगी जीने जैसी होती

कोई सपने होते
तो नींद में भी हँसी होती

कोई तमन्ना होती
तो दिवानगी भी फितरत होती

शायद कुछ कमीं होती
तो पुरा होने में खुशी होती

Tuesday, September 8, 2009

बात तो हुयी
पर वो बात नहीं थी
दिल में कुछ और था
दिमाग ने कुछ और कही

मौसम तो मस्त था
शायद मुस्कुरा भी रही थी
चाँद छुपन छुपाई खेल गया
और सुट्टे का ख्याल भी नही

सुन भी रही थी
पर क्या सुनना चाहती थी
ध्यान कहीं और था?
या फिर दिल में कोई और........

Thursday, September 3, 2009

एक रात की बात
बस एक जाम के बाद
पास में तन्हाई
और कुछ छल्लों के साथ
तू भी हसीना लगने लगी
आँखों में तेरे भी बिजली दिखी
तारीफ तेरी भी होती मुझसे
नखरे दिखाती तू भी अगर
आदत पड़ी है गुलामी की मुझे
इतनी इज्ज़त से लगता है डर
खुशबू तो फिर भी गुलाब में ही है
क्या हुआ थोड़े से काँटे है अगर