Wednesday, June 30, 2010

आँखों में चमक दिख जाती है
जब किसी के करीब होते हो
नज़रें ही पलट जाती हैं
जब हमसे मुख़ातिब होते हो

आवाज़ कि गहराई में नशा छा जाता है
उसके के लिए धुन जब बजाते  हो
साज़ का आगाज़ ही नहीं हो पाता
हमारे सामने जब भी आते  हो

ख़्वाबों कि दुनिया रंग जाती है
तस्वीर उसकी जब बनाते हो
एक लकीर भी बार बार बिगड़ जाती है
हमारी जुल्फें भी जब सँवारते हो

पर यकीन है हमे
कि हम कुछ ख़ास ही है
जिससे मिलके
सारे होश गँवाते हो

2 comments:

  1. एक सुंदर एहसास समेटे भावपूर्ण कविता..सुंदर रचना के लिए धन्यवाद!!

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  2. आवाज़ कि गहराई में नशा छा जाता है
    उसके के लिए धुन जब बनाते हो सुंदर रचना

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