Wednesday, June 16, 2010

कुछ अधूरी कहानियाँ
कुछ अनकहे किस्से
कुछ बिखरी ख्वाहिशें
कुछ भूले सपने

कुछ मनचली जिंदिगी
कुछ बेईमान हसरतें
कुछ बार बार गलतियां
कुछ कच्चे रस्ते

कुछ मीठी यादें
कुछ दिल कि बातें
कुछ महकती हवाएं
शायद कुछ ......अदाएं

Monday, May 17, 2010

टुकड़ों में जिए जा रहे हैं
खुद को गिने जा रहे हैं
हिम्मत नहीं खुद को पाने की
दूसरों को पाने की कोशिश किये जा रहे हैं

तमन्ना की भी तमन्ना नहीं
मुकम्मल होते देख डरे जा रहे हैं
ढूँढ़ते हैं बहाने हर वक़्त युहीं
खुशियों को नज़र लगाये जा रहे हैं

शिकवे तो  उनसे भी नहीं
जिनकी बदौलत पिए जा रहे हैं
ज़िन्दगी ने इख्तियार इतने दिए
कि रफ़्तार को रुकावट दिए जा रहे हैं

Monday, March 29, 2010

सादगी थी
खूबसूरती नहीं
याराना था
आवारगी नहीं
कसक  थी
सिसकियाँ नहीं
दीवानापन था
दिवानगी नहीं
मोहब्बत तो थी
पर  बदनामी नहीं
बटी हुई दो तरफ
किस किनारे पे भरोसा करे
तभी दौड़ती हुई
शायद समुन्दर को मिलती है
धड़कन सुनाई क्यों सुनाई दे रही
शायद दिल अब तक यहीं है
कोशिश तो बार बार कि है
पर दम निकलता ही नहीं है

Tuesday, February 23, 2010

वो ही एक लम्हा था
जब तुम्हे करीब पाया था
ढूँढ रही हूँ आज तक
उस एहसास का एक कतरा

आँखें क्यों झूठ बोल गयी
या फिर दिखा वही जो  देखना  चाहती थी
इल्म हो रहा है अब
की वो नज़रें मिलाके चुराते क्यों नहीं

दूरी से कोई शिक्वा ही नहीं
क्यूंकि पास वो कभी थे ही नहीं
खता सिर्फ इतनी हुई
कि महक को महबूब समझती रही

Sunday, January 31, 2010

ये रात का नशा है या बात का
या फिर हमारी उस मुलाक़ात का
जब तुम तो थे पर हम नहीं
सारी वो यादें बुनती हुई
कुछ अटक गया था सीने में
कब से खटक रहा था जीने में
जब तुम न थे और हम तनहा कहीं
झ्हल्कियां यूँ ही दिखती हुई
भांगू किधर , तेरी नज़र है
भांगू भी क्यूँ, जब तू ही इधर है
जब तुम होते तो मंजिल होती यहीं
पर अब रस्ता मिला है और ज़िन्दगी नयी