कोई आरज़ू होती
तो ज़िन्दगी जीने जैसी होती
कोई सपने होते
तो नींद में भी हँसी होती
कोई तमन्ना होती
तो दिवानगी भी फितरत होती
शायद कुछ कमीं होती
तो पुरा होने में खुशी होती
Saturday, September 19, 2009
Tuesday, September 8, 2009
Thursday, September 3, 2009
Friday, August 28, 2009
कुछ अपनी अदा में कहिये
सिर्फ़ मुस्कुराना वाज़िब नहीं
वक्त हो गया है बहुत
आपसे कुछ बात किए
शब्दों की ज़रूरत नही
खामोशी में इतनी बात है
आपकी साँसों की खुशबू ही
हमारे लिए कायनात है
संवर जाता है दिन
आपकी एक झलक पाके
धड़कन बढ़ जाती है
परछाई से ही टकराके
पराया न करिए इस हद तक
की आगाज़ हो अंत से
नज़र उठा के देखिये ज़रा
कुछ दिखाई दे इन आँखों में
सिर्फ़ मुस्कुराना वाज़िब नहीं
वक्त हो गया है बहुत
आपसे कुछ बात किए
शब्दों की ज़रूरत नही
खामोशी में इतनी बात है
आपकी साँसों की खुशबू ही
हमारे लिए कायनात है
संवर जाता है दिन
आपकी एक झलक पाके
धड़कन बढ़ जाती है
परछाई से ही टकराके
पराया न करिए इस हद तक
की आगाज़ हो अंत से
नज़र उठा के देखिये ज़रा
कुछ दिखाई दे इन आँखों में
Wednesday, August 19, 2009
आज कुछ कह दिया
एहसास भी नहीं हुआ
धड़कने तो तेज़ थीं
और शायद कहीं धुआं हुआ
होश तो था, मगर
मदहोशी की तमन्ना थी
उनके ही अंदाज़ में
दिल ने कुछ कुबूल किया
अदा तो है हम में भी
यूँ ही नही वो फ़िदा हुए
हमारी आँखें और उनकी बातें
दोनों में कुछ हलचल हुई
ख्याल ही रहता अगर
तो कसक रहती सीने में
महक गई मुस्कुराहट
मिल गई वजह जीने में
एहसास भी नहीं हुआ
धड़कने तो तेज़ थीं
और शायद कहीं धुआं हुआ
होश तो था, मगर
मदहोशी की तमन्ना थी
उनके ही अंदाज़ में
दिल ने कुछ कुबूल किया
अदा तो है हम में भी
यूँ ही नही वो फ़िदा हुए
हमारी आँखें और उनकी बातें
दोनों में कुछ हलचल हुई
ख्याल ही रहता अगर
तो कसक रहती सीने में
महक गई मुस्कुराहट
मिल गई वजह जीने में
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