Saturday, October 31, 2009

 dedicated to my friends at NID.....especially to pondy group...

आवारगी है , याराना है
हमारी महफ़िल ही ज़माना है
रौनक तो बसी है बन्दगी में
और चाहा ही क्या जिंदिगी में

क्यूँ मोड़ ऐसा आ गया, जहाँ से कोई " u turn" नहीं
काश हर दम रस्ता भूलें , और हर बार मुलाकात वहीँ

दीवानगी है , पैमाना है
बूँद बूँद का यहाँ ठिकाना है
हसरत इतनी नशा बढ़ता जाए
बरकत होती रहे पर हम न जाएँ

Tuesday, October 6, 2009

कुछ रोकता है तुम्हारे पास जाने से
कोई टोकता है तुम्हारे करीब आने पे
दिवानगी इस हद तक है
छलक न जाए तुम्हारे टकराने से

बोल दूँ गर तो कुछ कम न हो जाए
पी लूँ गर तो नशा बढ़ता ही जाए
आशिकी तो फ़लक तक है
अधर का मज़ा चरस्ता ही जाए

हसीं नजारों में एहसास और गहरा हुआ
आज़ादी की चाहत में दिल पे पहरा हुआ
आवारगी तो सनक तक है
भागूँ ख़ुद से कैसे, वो पल है यूँ ही ठहरा हुआ

Saturday, September 19, 2009

कोई आरज़ू होती
तो ज़िन्दगी जीने जैसी होती

कोई सपने होते
तो नींद में भी हँसी होती

कोई तमन्ना होती
तो दिवानगी भी फितरत होती

शायद कुछ कमीं होती
तो पुरा होने में खुशी होती

Tuesday, September 8, 2009

बात तो हुयी
पर वो बात नहीं थी
दिल में कुछ और था
दिमाग ने कुछ और कही

मौसम तो मस्त था
शायद मुस्कुरा भी रही थी
चाँद छुपन छुपाई खेल गया
और सुट्टे का ख्याल भी नही

सुन भी रही थी
पर क्या सुनना चाहती थी
ध्यान कहीं और था?
या फिर दिल में कोई और........

Thursday, September 3, 2009

एक रात की बात
बस एक जाम के बाद
पास में तन्हाई
और कुछ छल्लों के साथ
तू भी हसीना लगने लगी
आँखों में तेरे भी बिजली दिखी
तारीफ तेरी भी होती मुझसे
नखरे दिखाती तू भी अगर
आदत पड़ी है गुलामी की मुझे
इतनी इज्ज़त से लगता है डर
खुशबू तो फिर भी गुलाब में ही है
क्या हुआ थोड़े से काँटे है अगर

Friday, August 28, 2009

कुछ अपनी अदा में कहिये
सिर्फ़ मुस्कुराना वाज़िब नहीं
वक्त हो गया है बहुत
आपसे कुछ बात किए

शब्दों की ज़रूरत नही
खामोशी में इतनी बात है
आपकी साँसों की खुशबू ही
हमारे लिए कायनात है

संवर जाता है दिन
आपकी एक झलक पाके
धड़कन बढ़ जाती है
परछाई से ही टकराके

पराया न करिए इस हद तक
की आगाज़ हो अंत से
नज़र उठा के देखिये ज़रा
कुछ दिखाई दे इन आँखों में

Wednesday, August 19, 2009

आज कुछ कह दिया
एहसास भी नहीं हुआ
धड़कने तो तेज़ थीं
और शायद कहीं धुआं हुआ

होश तो था, मगर
मदहोशी की तमन्ना थी
उनके ही अंदाज़ में
दिल ने कुछ कुबूल किया

अदा तो है हम में भी
यूँ ही नही वो फ़िदा हुए
हमारी आँखें और उनकी बातें
दोनों में कुछ हलचल हुई

ख्याल ही रहता अगर
तो कसक रहती सीने में
महक गई मुस्कुराहट
मिल गई वजह जीने में