क्यूँ नहीं चाहते तुम
की तुम्हे भी कोई याद करे
सूरज की परछाई में
कोई तुमसे भी इकरार करे
देखो कभी पलट कर तुम
कोई नज़रें बेताब दिखाई दे
बिना कुछ बजे ही
धड़कने सुनाई दे
दुःख होता हो शायद उसको
जब दीवानगी कहीं और दिखे
तुम्हारी एक झलक को तरसे
जो तुमपे इतना एतबार करे
यकीन रखो ख़ुद पे तो इतना
तुम्हे ही कोई प्यार करे
Wednesday, August 19, 2009
Tuesday, August 18, 2009
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