dedicated to my friends at NID.....especially to pondy group...
आवारगी है , याराना है
हमारी महफ़िल ही ज़माना है
रौनक तो बसी है बन्दगी में
और चाहा ही क्या जिंदिगी में
क्यूँ मोड़ ऐसा आ गया, जहाँ से कोई " u turn" नहीं
काश हर दम रस्ता भूलें , और हर बार मुलाकात वहीँ
दीवानगी है , पैमाना है
बूँद बूँद का यहाँ ठिकाना है
हसरत इतनी नशा बढ़ता जाए
बरकत होती रहे पर हम न जाएँ
Saturday, October 31, 2009
Tuesday, October 6, 2009
कुछ रोकता है तुम्हारे पास जाने से
कोई टोकता है तुम्हारे करीब आने पे
दिवानगी इस हद तक है
छलक न जाए तुम्हारे टकराने से
बोल दूँ गर तो कुछ कम न हो जाए
पी लूँ गर तो नशा बढ़ता ही जाए
आशिकी तो फ़लक तक है
अधर का मज़ा चरस्ता ही जाए
हसीं नजारों में एहसास और गहरा हुआ
आज़ादी की चाहत में दिल पे पहरा हुआ
आवारगी तो सनक तक है
भागूँ ख़ुद से कैसे, वो पल है यूँ ही ठहरा हुआ
कोई टोकता है तुम्हारे करीब आने पे
दिवानगी इस हद तक है
छलक न जाए तुम्हारे टकराने से
बोल दूँ गर तो कुछ कम न हो जाए
पी लूँ गर तो नशा बढ़ता ही जाए
आशिकी तो फ़लक तक है
अधर का मज़ा चरस्ता ही जाए
हसीं नजारों में एहसास और गहरा हुआ
आज़ादी की चाहत में दिल पे पहरा हुआ
आवारगी तो सनक तक है
भागूँ ख़ुद से कैसे, वो पल है यूँ ही ठहरा हुआ
Saturday, September 19, 2009
Tuesday, September 8, 2009
Thursday, September 3, 2009
Friday, August 28, 2009
कुछ अपनी अदा में कहिये
सिर्फ़ मुस्कुराना वाज़िब नहीं
वक्त हो गया है बहुत
आपसे कुछ बात किए
शब्दों की ज़रूरत नही
खामोशी में इतनी बात है
आपकी साँसों की खुशबू ही
हमारे लिए कायनात है
संवर जाता है दिन
आपकी एक झलक पाके
धड़कन बढ़ जाती है
परछाई से ही टकराके
पराया न करिए इस हद तक
की आगाज़ हो अंत से
नज़र उठा के देखिये ज़रा
कुछ दिखाई दे इन आँखों में
सिर्फ़ मुस्कुराना वाज़िब नहीं
वक्त हो गया है बहुत
आपसे कुछ बात किए
शब्दों की ज़रूरत नही
खामोशी में इतनी बात है
आपकी साँसों की खुशबू ही
हमारे लिए कायनात है
संवर जाता है दिन
आपकी एक झलक पाके
धड़कन बढ़ जाती है
परछाई से ही टकराके
पराया न करिए इस हद तक
की आगाज़ हो अंत से
नज़र उठा के देखिये ज़रा
कुछ दिखाई दे इन आँखों में
Wednesday, August 19, 2009
आज कुछ कह दिया
एहसास भी नहीं हुआ
धड़कने तो तेज़ थीं
और शायद कहीं धुआं हुआ
होश तो था, मगर
मदहोशी की तमन्ना थी
उनके ही अंदाज़ में
दिल ने कुछ कुबूल किया
अदा तो है हम में भी
यूँ ही नही वो फ़िदा हुए
हमारी आँखें और उनकी बातें
दोनों में कुछ हलचल हुई
ख्याल ही रहता अगर
तो कसक रहती सीने में
महक गई मुस्कुराहट
मिल गई वजह जीने में
एहसास भी नहीं हुआ
धड़कने तो तेज़ थीं
और शायद कहीं धुआं हुआ
होश तो था, मगर
मदहोशी की तमन्ना थी
उनके ही अंदाज़ में
दिल ने कुछ कुबूल किया
अदा तो है हम में भी
यूँ ही नही वो फ़िदा हुए
हमारी आँखें और उनकी बातें
दोनों में कुछ हलचल हुई
ख्याल ही रहता अगर
तो कसक रहती सीने में
महक गई मुस्कुराहट
मिल गई वजह जीने में
Tuesday, August 18, 2009
Saturday, July 4, 2009
some of my creations......
खामोशी ने दी है दस्तक खूबसूरत सी एक आस को
खामोशी ने बुझ्हाया है जन्मों की एक प्यास को
तलाश में तो थे हम शब्दों के
पर हाथ लगाया हमने खामोशी के राज़ को
खामोशी ने दिखाया है नज़रों का झुकना
खामोशी ने फ़रमाया है होठों का न हिलना
सुनना तो चाहते थे गीतों के गुन्जुन को
पर चाहत बनाई हमने खामोशी की श्वास को
खामोशी तो एक अदा है जो सब पे मेहेरबान नही होति
खामोशी तो एक नशा है जो सबपे रंग नही चढाती
भटक तो रहे थे गुनगुनाते हुए भवरें की तरह
पर गले लगाया हमने खामोशी के साज़ को
खामोशी तो एक ताकत है
जिससे शब्द भी शर्मा जाए
खामोशी तो इबादत है
जिससे खुदा भी हिल जाए
लोग तो कहते है खामोशी मजबूर है
हमसे पूछे कोई, खामोशी तो एक सुरूर है
लोग तो कहते है खामोशी.. खामोश है
हमने महसूस किया है.. खामोशी, मदहोश है
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